
बोकारो जिले के चंदनकियारी प्रखंड का बांसगाड़ी गांव, जहां किसानों की मेहनत और पसीने से खेतों में हरियाली की चादर बिछी है। यहां के किसान साल के बारहों महीने खेती में जुटे रहते हैं। खेतों में कहीं पत्तागोभी लहलहा रही है, तो कहीं फूलगोभी, बैंगन, आलू और दूसरी सब्जियां किसानों की मेहनत की कहानी बयां कर रही हैं। खेती ही यहां के लोगों की आजीविका का मुख्य आधार है। इसी के दम पर किसान अपने परिवार का भरण-पोषण करने के साथ बच्चों को बेहतर शिक्षा भी दिला रहे हैं। लेकिन विडंबना देखिए, मेहनत से खेतों को हरा-भरा रखने वाले इन किसानों को आज भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था का इंतजार है। ग्रामीणों का कहना है कि बांसगाड़ी को आदर्श गांव का दर्जा तो दिया गया, लेकिन किसानों की बुनियादी समस्याएं अब भी बरकरार हैं।

चंदनकियारी प्रखंड के बांसगाड़ी गांव के किसानों ने अपनी मेहनत और परिश्रम के बल पर खेती को अपनी पहचान बना लिया है। यहां बड़े पैमाने पर पत्तागोभी और फूलगोभी की खेती की जाती है। इसके अलावा बैंगन, आलू और मौसम के अनुसार दूसरी सब्जियां भी उगाई जाती हैं। साल के बारहों महीने खेतों में कृषि कार्य चलता रहता है। किसानों की मेहनत का ही नतीजा है कि खेती यहां के अनेक परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन बनी हुई है। बांसगाड़ी के किसान खेती को सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि अपने परिवार का भविष्य संवारने का जरिया मानते हैं। खेतों में दिन-रात मेहनत कर किसान अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं और बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाने का सपना भी पूरा कर रहे हैं।
गांव के किसान मनोज सिंह, भोलू गोप और जितेंद्र रजवार बताते हैं कि यहां के किसान बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती करते हैं। पूरे साल खेती का काम चलता है और इसी से परिवारों की जरूरतें पूरी होती हैं। लेकिन किसानों की सबसे बड़ी परेशानी सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं होना है। ग्रामीणों के अनुसार, खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए सरकारी स्तर पर पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है। किसान तालाब के पानी के सहारे अपनी फसलों की सिंचाई करते हैं। ऐसे में पानी की कमी खेती के लिए बड़ी चुनौती बनी रहती है। किसानों का कहना है कि यदि खेतों में डीप बोरिंग और सिंचाई की बेहतर व्यवस्था हो जाए, तो सब्जियों की खेती को और बढ़ावा मिल सकता है।

किसानों का आरोप है कि चुनाव के समय सांसद और विधायक खेतों तक पानी पहुंचाने तथा डीप बोरिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन देते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद उनकी समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। ग्रामीणों का कहना है कि बांसगाड़ी गांव को आदर्श गांव घोषित किया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को अब भी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार है।
बांसगाड़ी के किसान अपनी मेहनत से खेतों में हरियाली और परिवारों के जीवन में खुशहाली लाने की कोशिश कर रहे हैं। सवाल यह है कि जब गांव के किसान खेती के जरिए अपनी तकदीर बदलने में जुटे हैं, तो उनकी मदद के लिए सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था कब होगी? आखिर कब इन किसानों को चुनावी वादों से आगे बढ़कर धरातल पर सुविधाएं मिलेंगी? अब देखना होगा कि संबंधित जनप्रतिनिधि और प्रशासन किसानों की इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं।

