बोकारो। पेटरवार प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में सुरक्षित एवं सशक्त झारखंड अभियान के अंतर्गत अनुमंडल स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं एवं बालिकाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, बाल विवाह पर रोकथाम, डायन कुप्रथा उन्मूलन एवं लैंगिक समानता को सुदृढ़ करना रहा। कार्यशाला का शुभारंभ उपायुक्त अजय नाथ झा, उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार, अपर समाहर्ता मो. मुमताज अंसारी, एसडीओ बेरमो मुकेश मछुआ, डीएसडब्ल्यूओ डा. सुमन गुप्ता, स्टेट नोडल पदाधिकारी सुजाता कुमारी, नोडल रिसोर्स पर्सन विक्रम कुमार आदि ने दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि यदि महिलाएं ठान लें तो महिलाओं पर अत्याचार नहीं हो सकता। महिलाएं स्वयं में सशक्त हैं, जरूरत है तो केवल आत्मविश्वास और जागरूकता की। उन्होंने समाज से महिलाओं के प्रति सम्मान और समान अवसर की भावना विकसित करने की अपील की।
उपायुक्त ने कहा कि बेटियां देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण संसाधन हैं। जिस घर में बेटी का जन्म हो, वहां खुशियां मनाई जानी चाहिए। उन्होंने समाज के लोगों से आह्वान किया कि वह ऐसे घरों में जाकर बधाई दें, उपहार दें और गर्व के साथ कहें – बधाई हो, बेटी हुई है…। इससे बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि जो लोग आपको आशीर्वाद देने के लिए हाथ उठाते हैं, जो कहते हैं खुश रहो और खूब तरक्की करो – उन्हीं का आशीर्वाद लें। नकारात्मक सोच रखने वालों से प्रभावित होकर स्वयं को कमजोर नहीं समझें। उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि कैसे सती प्रथा, बेटियों के पढ़ने के लिए क्रमशः राजा राम मोहन राय – सावित्री बाई फुले ने पहल किया। कैसे बाल विवाह रोकने के लिए कानून बना आदि की जानकारी दी।
उपायुक्त ने महिलाओं के अधिकारों पर बल देते हुए कहा कि महिलाओं का श्रृंगार, पहनावा और जीवनशैली उनका निजी अधिकार है। पति के निधन के बाद कोई दूसरा व्यक्ति यह तय नहीं कर सकता कि महिला कैसे रहे या कैसे दिखे। यह महिलाओं की गरिमा और आत्मसम्मान से जुड़ा विषय है।
उपायुक्त ने कहा कि हम सभी मिलकर बोकारो जिले को बाल विवाह मुक्त जिला बनाएंगे। साथ ही उन्होंने समाज में व्याप्त डायन जैसी अमानवीय कुरीतियों को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया। मौके पर उन्होंने बाल विवाह एवं डायन कुप्रथा के खिलाफ शपथ पढ़ा, जिसका उपस्थित सभी ने दोहराव किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप विकास आयुक्त (डीडीसी) शताब्दी मजूमदार ने कहा कि बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं है। बेटियों को खूब पढ़ाएं। जो राशि उनकी शादी के लिए एकत्र की जा रही है, उसे उनकी शिक्षा और कौशल विकास पर खर्च करें। उन्होंने कहा कि शिक्षित और आत्मनिर्भर बेटियों के लिए योग्य वर स्वयं कतार में खड़े होंगे।
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी (डीएसडब्ल्यूओ) डा. सुमन गुप्ता ने बाल विवाह एवं डायन कुप्रथा से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने आमजनों से अपील की कि ऐसी किसी भी घटना की सूचना तुरंत डायल 112 अथवा चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर दें, ताकि समय रहते प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बताया कि प्रमंडल – जिला – प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर बाल विवाह निषेध पदाधिकारी घोषित है। उन्होंने बेटियों के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं पीएमएमवीवाई – सावित्री बाई फुले किशोरी समृद्धि योजना – मुख्यमंत्री कन्यादान योजना आदि की जानकारी दी।
प्रशिक्षण सह कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को स्टेट नोडल पदाधिकारी श्रीमती सुजाता कुमारी – स्टेट रिसोर्स पर्सन श्री विक्रम कुमार ने महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित कानूनों, सरकारी योजनाओं, सुरक्षा उपायों तथा शिकायत निवारण तंत्र की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान किया गया। वीडियो के माध्यम से सरल अंदाज में बातें को बताया।
कार्यक्रम में जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री जगरनाथ लोहरा, जिला शिक्षा अधीक्षक श्री अतुल चौबे, अनुमंडल क्षेत्र के सभी बीडीओ – सीओ, मुखिया, पंचायत सचिव, संबंधित विभागों के पदाधिकारी, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की बच्चियां आदि उपस्थित रहें।








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