बोकारो।
वेदांता लिमिटेड ने गुरुवार को ‘विविध वर्स’ का अनावरण किया। यह एक लिमिटेड एडिशन, कलेक्टिबल और प्रीमियम द्विभाषी पत्रिका है, जो पहली बार भारत की कहानी कहने की परंपरा को अनदेखी, अनसुनी और सावधानीपूर्वक चुनी गई कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत करती है। इस पत्रिका में संस्कृति, सार्वजनिक नीति, उद्यमिता, एआई, खेल, जमीनी भारत और अन्य विषयों से जुड़ी विचारशील बातचीत और विशेष रूप से चुनी गई कहानियों को शामिल किया गया है।
तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया के बीच ‘विविध वर्स’ प्रिंट माध्यम में एक ऐसा दुर्लभ ठहराव प्रस्तुत करता है, जहां विचार खुलकर सामने आते हैं, कहानियां प्रेरित करती हैं और भारत के विविध अनुभव व दृष्टिकोण एक साथ जुड़ते हैं। प्रिंट और डिजिटल दोनों रूपों में उपलब्ध इस विशेष और अनूठी स्टोरीटेलिंग कलेक्टिबल की हर कड़ी भारत के गांवों, कक्षाओं, फैक्ट्री परिसरों, स्टार्टअप्स और सांस्कृतिक दुनिया से जुड़ी आवाज़ों को एक साथ पिरोती है। यह एक ओर देश की सदियों पुरानी परंपराओं को दर्शाती है, तो दूसरी ओर आगे बढ़ते भारत की नई आकांक्षाओं को भी सामने लाती है। इसमें कलाकारों, उद्यमियों, नीति निर्माताओं, नवाचारकर्ताओं और बदलाव लाने वाले लोगों के विचार शामिल हैं, जो आधुनिक भारत को नई दिशा दे रहे हैं।
अपने फोरवर्ड संदेश में अनिल अग्रवाल, चेयरमैन, वेदांता ग्रुप ने कहा, “राष्ट्र निर्माण केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर खड़े करने या अरबों डॉलर के व्यवसाय बनाने तक सीमित नहीं हो सकता। असल मायनों में यह अवसर पैदा करने, उद्योगों को बढ़ावा देने, महिलाओं को सशक्त बनाने और यह सुनिश्चित करने के बारे में है कि बच्चों को सही पोषण और शिक्षा मिले। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत की क्षमता पर विश्वास किया जाए और उसे एक मंच दिया जाए। ‘विविध वर्स’ इसी विश्वास से जन्मा है। यह विश्वास कि कहानियों में सोच बदलने और भविष्य को आकार देने की ताकत होती है।”
“यह पत्रिका उन करोड़ों भारतीयों को समर्पित है, जो अपनी मेहनत से देश को आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसे समय में, जब अनिश्चितता और उम्मीद दोनों साथ मौजूद हैं, हमें शोर नहीं बल्कि स्पष्ट सोच की जरूरत है। यह पत्रिका उसी स्पष्टता की दिशा में एक कदम है,”







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